作曲:Parth Mistry
作词:Farhan Khan
बचपन में साइकिल छोड़ अच्छा सामान अपनी
साइकिल में लगा के बाकी की साइकिल थे दलदल
में छोड़ स्कूल में हाथ छोड़ने की औकात
नहीं थी में कैंटीन के लिए पर धक्का लगने
पर ही थे ना फोर्थ एचआर तो उस मुसलमान पैर
सा देख चारों दिशाओं की आंखों का काटा
प्रभाव छोड़ने की बात तो दूर मालूम था कि
खोलकर देखने तहसील का चाटा जड़ में ₹5 एक
छोटा गोल्ड फ्लैक और तो राधा 1 इंच ले
लिया सबने मिल के फटाई का नया कुर्ता पर
फिर भी अभागा ओखर परमार अलग आपने कहा आपके
घर पर आया तुझे शर्म ना आयी वैभव अमर रहे
तेरा बेटा हॉस्पिटल पट्टी ना दिखाई और पीस
दिखाता भी कैसे बनाना के पिछड़े लड़के
मेरी बहनों को बिछड़ते आज एक देखने पर
दूसरा कहता है फरहान की बहन खाल खींच लेगा
तो भाई रहने दें और आज विवाह सुबह शक्ल
वहीं मासूम चेहरा और पागल से है वहीं भाग
दौड़ भरी जिंदगी वही मारपीट कभी हां और
कभी चैन से अल्हम्दुलिल्लाह